मुर्गों को जिंदा दफना रहे हैं कारोबारी, दाने के पैसे नहीं होने से परेशान पाेल्ट्री फार्म संचालक

Bulletin 2020-04-03

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कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर तरह तरह की अफवाहें चल रही है। जिसमें एक बात यह भी फैली है कि मांसाहार खासकर चिकन से ये फेलता है। हकीकत जो भी है लेकिन इस अफवाह ने पोल्ट्रीफार्म के कारोबार को ठप कर दिया है। पाेल्ट्री फार्म संचालकों की हालत यह कि उनके पास मुर्गियों को खिलाने के दाने तक के पैसों का जुगाड नहीं हो पा रहा है। इसके चलते वे या तो मुर्गियों को खेतों में छोड़ रहे हैं या उन्हें जिंदा दफना रहे हैं। जेसीबी से गड्ढे खोदकर जिंदा दफना रहे क्षेत्र में अधिकांश पोल्ट्री फार्म संचालकों ने सारी मुर्गियों को जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया है। इसके पिछे फार्म संचालक कारण यह बता रह हैं कि उनका अधिकांश कारोबार रोड पर बने ढाबों के भरोसे चलते थे। जो कि लॉक डाउन के चलते पूरी तरह से बंद है। इसके अलावा सीमाएं पूरी तरह से सील हो चुकी है। जिससे मुर्गियों का निर्यात भी नहीं किया जा रहा है। इसके चलते पोल्ट्री फार्म संचालकों के पास मुर्गियों का भारी भंडारण हो गया है। अब इस भंडारण के चलते फार्म संचालकों की मुसिबत और अधिक बढ़ गई है। मंदसौर के गरोठ के फार्म संचालक नासिर कुरैशी ने बताया उन्होंने तीन हजार मुर्गे सोमवार को ही उन्होंने जिंदा दफन कर दिए। जिले में 70 हजार से अधिक मुर्गो को दफना दिया गया।

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